सिक्किम में ग्लेशियल झीलों से जुड़े खतरे को लेकर सरकार ने निगरानी और बचाव की तैयारी तेज कर दी है। राज्य में 40 हाई-हैजार्ड झीलों की पहचान हुई है, जिनमें 16 को सबसे ज्यादा जोखिम वाली कैटेगरी-A में रखा गया है।

हिमालयी राज्य सिक्किम में ग्लेशियल झीलों से अचानक बाढ़ आने के खतरे को लेकर चिंता बढ़ गई है। राज्य सरकार ने 40 ऐसी ग्लेशियल झीलों की पहचान की है, जिन्हें हाई-हैजार्ड यानी अत्यधिक जोखिम वाली कैटेगरी में रखा गया है। इनमें 16 झीलें कैटेगरी-A में हैं, जिन्हें सबसे ज्यादा जोखिम वाली श्रेणी माना गया है।
अगर इन झीलों में अचानक पानी का दबाव बढ़ता है या कोई प्राकृतिक घटना उन्हें प्रभावित करती है, तो निचले इलाकों में बसे गांवों और दूसरी बस्तियों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
मुख्य बातें
- सिक्किम में 40 हाई-हैजार्ड ग्लेशियल झीलों की पहचान की गई है।
- इनमें 16 झीलें कैटेगरी-A में, 2 कैटेगरी-B में और 9 कैटेगरी-C में हैं।
- राज्य सरकार सैटेलाइट तस्वीरों और रिमोट सेंसिंग से झीलों में बदलाव पर नजर रख रही है।
- शाको चो और गुरुडोंगमार कॉम्प्लेक्स समेत कई इलाकों में खतरा कम करने की योजनाओं पर काम चल रहा है।
ग्लेशियल झीलें कैसे बनती हैं और खतरा कब बढ़ता है?
ग्लेशियल झीलें ग्लेशियरों के पिघलने से निकलने वाले पानी के जमा होने से बनती हैं। तापमान बढ़ने के साथ जब ग्लेशियर पीछे हटते हैं, तो नई झीलें बन सकती हैं और पहले से मौजूद झीलों का आकार भी बढ़ सकता है।
अगर किसी झील में पानी बहुत ज्यादा जमा हो जाए या भूकंप जैसी प्राकृतिक घटना उसका असर डाले, तो झील अचानक टूट सकती है। इससे बड़ी मात्रा में पानी तेजी से नीचे की ओर बह सकता है। इस घटना को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF कहा जाता है।
40 झीलों में 16 सबसे ज्यादा जोखिम वाली
| कैटेगरी | झीलों की संख्या | जोखिम |
|---|---|---|
| कैटेगरी-A | 16 | सबसे ज्यादा जोखिम |
| कैटेगरी-B | 2 | हाई रिस्क |
| कैटेगरी-C | 9 | मध्यम से कम जोखिम |
| अनक्लासिफाइड | 13 | अभी वर्गीकृत नहीं |
राज्य के प्रधान सचिव संदीप तांबे के मुताबिक, ग्लेशियल झीलों में होने वाले बदलावों पर नजर रखने के लिए सैटेलाइट तस्वीरों और रिमोट सेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
2023 में सिक्किम झेल चुका है GLOF की तबाही
सिक्किम अक्टूबर 2023 में GLOF से जुड़ी बड़ी आपदा का सामना कर चुका है। उस दौरान आई बाढ़ में कम से कम 60 लोगों की मौत हुई थी। मंगन, गंगटोक, पाकयोंग और नामची जिलों में व्यापक नुकसान हुआ था। इस आपदा में चुंगथांग बांध भी तबाह हो गया था।
इस घटना के बाद ग्लेशियल झीलों की निगरानी और खतरे की समय रहते पहचान की जरूरत पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।
शाको चो झील पर खास नजर
सिक्किम सरकार ने शाको चो झील को GLOF के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील माना है। इसके लिए तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजी जा चुकी है। वहीं प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट जल शक्ति मंत्रालय को भेजी गई है।
ल्होनक कॉम्प्लेक्स में मुगुथांग के पास डोलमा साम्पा में बाढ़ रोकने वाली संरचना बनाने के लिए केंद्रीय जल आयोग और सिक्किम सरकार मिलकर DPR तैयार कर रहे हैं।
गुरुडोंगमार में मोरेन प्लग वॉल का प्रस्ताव
गुरुडोंगमार कॉम्प्लेक्स के लिए झील के आउटलेट पर मोरेन प्लग वॉल बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और ब्रह्मपुत्र बोर्ड इस पर मिलकर काम कर रहे हैं। योजना में GLOF के खतरे के साथ गुरुडोंगमार झील के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
झीलों का जलस्तर घटाने के विकल्पों पर काम
खतरा कम करने के लिए साइफनिंग, पंपिंग, मौजूदा जल निकासी चैनलों में सुधार, कृत्रिम चैनल बनाना, मोरेन की कटिंग के साथ सुरक्षा दीवार और सुरंग बनाने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रधान निदेशक-सह-सचिव डीजी श्रेष्ठ ने बताया कि GLOF से निपटने के लिए चार चरणों की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसमें प्रारंभिक आकलन, व्यापक आकलन, जोखिम कम करने के उपायों की डिजाइन और उनके क्रियान्वयन को शामिल किया गया है।
देश का पहला समर्पित GLOF प्रोटोकॉल बनाने की तैयारी
सिक्किम सरकार देश का पहला समर्पित ‘GLOF रिस्क मिटिगेशन प्रोटोकॉल’ तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। इसका मकसद ग्लेशियल बाढ़ के जोखिम का वैज्ञानिक आकलन, तैयारी और जोखिम कम करने के लिए एक समान ढांचा तैयार करना है।
हिमालयी राज्यों की तैयारियों की समीक्षा
GLOF और हिमस्खलन के खतरे को देखते हुए केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बैठक में गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, केंद्रीय जल आयोग, भारत मौसम विज्ञान विभाग और डिफेंस जियोइन्फॉर्मेटिक्स रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। सिक्किम में अतिरिक्त अर्ली-वॉर्निंग सेंसर लगाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

Praveen Yadav is the Founder and Editor at The Nation Bulletin. With over 3 years of experience in digital journalism and news reporting, he covers national affairs, governance, and breaking current events with a commitment to factual accuracy and verified reporting.


