बस्ती वाल्टरगंज थानाध्यक्ष मामला: हनीट्रैप और वसूली सिंडिकेट का खुलासा

बस्ती वाल्टरगंज थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह मामले में हनीट्रैप सिंडिकेट की जांच

बस्ती: उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में वाल्टरगंज थाने के पूर्व थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की मौत की जांच में पुलिस ने एक कथित संगठित हनीट्रैप और जबरन वसूली सिंडिकेट का खुलासा किया है। 29 अगस्त को सरकारी आवास में हुई उनकी मौत के शुरुआती निरीक्षण के बाद पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल डेटा और परिजनों की शिकायत के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। जांच के बाद पुलिस ने 6 सितंबर को तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें एक महिला, उसका पिता और एक अधिवक्ता शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को निशाना बनाता था। पहले व्यक्तिगत नजदीकी बढ़ाई जाती थी, फिर निजी बातचीत और डिजिटल सामग्री के जरिए दबाव बनाया जाता था। इसके बाद सामाजिक बदनामी और झूठे आपराधिक मुकदमे में फंसाने का डर दिखाकर पैसे की मांग की जाती थी। पुलिस जांच में पूर्व थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह के अलावा कई अन्य लोगों से भी रकम वसूले जाने की बात सामने आई है।

सूर्य प्रकाश सिंह का पुलिस सेवा में लंबा सफर

सूर्य प्रकाश सिंह की उम्र करीब 57 वर्ष थी और वे मूल रूप से आजमगढ़ के अतरौलिया थाना क्षेत्र के ग्राम भीलमपुर छपरा के रहने वाले थे। उन्होंने 15 फरवरी 1988 को उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के तौर पर नौकरी शुरू की थी। 7 सितंबर 2008 को वे हेड कांस्टेबल बने और 11 नवंबर 2016 को वरिष्ठता के आधार पर सब-इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नत हुए।

उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा संदीप सिंह हैं। दो बच्चे विवाहित हैं, जबकि छोटी बेटी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। परिवार के अनुसार, छोटी बेटी से उनका विशेष लगाव था।

सिद्धार्थनगर से बस्ती स्थानांतरण के बाद उन्होंने पहले पासपोर्ट सेल और फिर पुलिस अधीक्षक के पीआरओ के तौर पर काम किया। करीब चार महीने पहले उन्हें वाल्टरगंज थाने का स्वतंत्र प्रभार दिया गया था। यह बस्ती में थाना प्रभारी के रूप में उनकी पहली तैनाती थी। सहकर्मियों के अनुसार वे सामान्य तौर पर संतुलित और सकारात्मक व्यवहार वाले अधिकारी माने जाते थे।

29 अगस्त को क्या हुआ था?

29 अगस्त की सुबह करीब 10 बजे वाल्टरगंज थाने में स्टाफ बैठक और सरकारी काम निपटाने के बाद सूर्य प्रकाश सिंह दोपहर करीब 1 बजे अपने हमराहियों के साथ बस्ती शहर पहुंचे। कटरा पानी टंकी के पास उन्होंने वाहन रुकवाया और हमराहियों को सिविल लाइन्स पुलिस चौकी पर इंतजार करने के लिए कहा। इसके बाद वे कलेक्ट्रेट और जिलाधिकारी कार्यालय के पास स्थित अपने सरकारी आवास की ओर चले गए।

दोपहर बाद जब उनके मोबाइल पर किए गए कई फोन का जवाब नहीं मिला तो साथियों को चिंता हुई। सिविल लाइन्स चौकी प्रभारी को सूचना दी गई। इसके बाद उसी आवास में रहने वाले सब-इंस्पेक्टर बलराम से संपर्क किया गया। शाम को ड्यूटी से लौटने पर बलराम ने आवास का दरवाजा बंद पाया। कई बार आवाज देने के बाद भी जवाब नहीं मिला। पुलिसकर्मियों ने दरवाजा खोलकर अंदर देखा तो सूर्य प्रकाश सिंह मृत अवस्था में मिले।

प्राथमिक जांच के दौरान कमरे से कोई पारंपरिक सुसाइड नोट नहीं मिला। हालांकि, उनके मोबाइल पर घटना की सुबह लगाया गया व्हाट्सऐप स्टेटस जांच का हिस्सा बना। उसमें लिखा था, “धन संपदा भी आवश्यक है, परंतु शांति और प्रेम से बढ़कर नहीं।” बाद की पुलिस जांच में आर्थिक दबाव और मानसिक प्रताड़ना से जुड़े आरोप सामने आए। डीआईजी संजीव त्यागी और एसपी डॉ. यशवीर सिंह ने मौके पर पहुंचकर फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए।

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परिवार की शिकायत के बाद शुरू हुई गहराई से जांच

अंतिम संस्कार के बाद परिवार ने सूर्य प्रकाश सिंह के निजी संपर्कों और वित्तीय लेन-देन की जानकारी जुटानी शुरू की। घटना के सात दिन बाद उनके बेटे संदीप सिंह ने बस्ती सदर कोतवाली में लिखित तहरीर दी। इसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।

डीआईजी संजीव त्यागी की निगरानी में कोतवाली पुलिस और जिला सर्विलांस सेल की संयुक्त टीम बनाई गई। पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, टावर डंप और मुखबिर तंत्र से मिली जानकारी का इस्तेमाल किया। इसी जांच के आधार पर 6 सितंबर को सुबह करीब 7:55 बजे सदर अस्पताल चौराहे के सामने घेराबंदी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तारी के बाद उसी दिन दोपहर 2:56 बजे पुलिस लाइन सभागार में प्रेसवार्ता कर डीआईजी संजीव त्यागी ने मामले का खुलासा किया। कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक बृजानंद सिंह, उपनिरीक्षक जयविंद कुमार यादव, उपनिरीक्षक अजय कुमार यादव, सर्विलांस प्रभारी शेषनाथ यादव और आरक्षी स्कंद यादव, किशन सिंह तथा राकेश यादव शामिल रहे।

तीन लोगों से बना था कथित सिंडिकेट

पुलिस जांच के अनुसार, गिरोह में तीन लोगों की अलग-अलग भूमिका थी। पुलिस ने प्रियंका चौधरी, रामनयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से जबरन वसूली के पैसे से खरीदी गई बताई गई महिंद्रा बोलेरो और अपराध में इस्तेमाल किए गए तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए।

आरोपीपृष्ठभूमिपुलिस के अनुसार भूमिका
प्रियंका चौधरी, 32 वर्षबावनपार, पैकोलिया की रहने वाली, वर्तमान में गंधार, वाल्टरगंज में रह रही थी। पहले मुंबई के ब्यूटी पार्लर और स्पा सेंटरों में काम कर चुकी थी।लक्षित लोगों से नजदीकी बढ़ाना, निजी बातचीत और डिजिटल सामग्री तैयार करना तथा भावनात्मक दबाव बनाना।
रामनयन चौधरीग्राम गंधार, थाना वाल्टरगंज का निवासी और प्रियंका का पिता।पीड़ितों पर सामाजिक बदनामी और परिवार से जुड़े दबाव का इस्तेमाल करना तथा मध्यस्थ की भूमिका निभाना।
विजय प्रकाश यादवग्राम पिपरा काजी, थाना पैकोलिया निवासी और पंजीकृत सिविल व क्रिमिनल अधिवक्ता।कानूनी कार्रवाई और दुष्कर्म के मुकदमे का डर दिखाकर समझौते और पैसों की वसूली में भूमिका निभाना।

हनीट्रैप का तरीका क्या था?

पुलिस के अनुसार, प्रियंका चौधरी संपन्न लोगों को पहचानने और उनसे संपर्क बढ़ाने का काम करती थी। आरोप है कि निजी संबंध बनने के बाद बातचीत, चैट और वीडियो कॉल से जुड़ी सामग्री सुरक्षित कर ली जाती थी। बाद में इसी सामग्री का इस्तेमाल पैसे की मांग के लिए किया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि जब कोई व्यक्ति पैसे देने से इनकार करता या दूरी बनाने की कोशिश करता तो उस पर मानसिक दबाव बढ़ाया जाता था। पुलिस के अनुसार, प्रियंका वीडियो कॉल के दौरान खुद को नुकसान पहुंचाने का दृश्य दिखाकर सामने वाले व्यक्ति में डर पैदा करती थी। इसके बाद पीड़ित को यह डर रहता था कि किसी गंभीर मामले में उसे आरोपी बनाया जा सकता है।

इसके बाद रामनयन चौधरी कथित तौर पर सामाजिक बदनामी का दबाव बनाते थे। अधिवक्ता विजय प्रकाश कानूनी कार्रवाई और दुष्कर्म के मुकदमे का डर दिखाकर समझौते की बात आगे बढ़ाते थे। पुलिस के अनुसार, इसी तरीके से रकम तय की जाती थी और बाद में तीनों के बीच उसका बंटवारा होता था।

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सूर्य प्रकाश सिंह समेत कई लोगों से वसूली का आरोप

पुलिस की आर्थिक और फॉरेंसिक जांच के अनुसार, सूर्य प्रकाश सिंह इस कथित सिंडिकेट के अकेले पीड़ित नहीं थे। जांच में कई अन्य लोगों से भी पैसे लिए जाने की जानकारी सामने आई है।

पीड़ितसंपर्क का माध्यमपुलिस के अनुसार वसूलीआरोपित दबाव का तरीका
डॉ. उमेश, पुरैना, वाल्टरगंजप्रियंका और उसके पिता उनके मकान में किराएदार थे।₹4 लाखनिजी संबंधों से जुड़े आरोप और पुलिस शिकायत की धमकी।
अहमद रजा, जमदाशाही, वाल्टरगंजगिरोह के इस्तेमाल वाले वाहन का चालक।₹5 लाखनिजी नजदीकी का फायदा उठाकर डिजिटल सामग्री और समझौते का दबाव।
आर्यन दीक्षित उर्फ जितेंद्र दीक्षित, मुंबई/जबलपुरमुंबई में व्यावसायिक और व्यक्तिगत परिचय।₹15 लाखकानूनी कार्रवाई और दुष्कर्म के झूठे केस का डर।
स्व. सूर्य प्रकाश सिंहस्थानीय क्षेत्र और आधिकारिक संपर्क।₹15 लाख से अधिकप्रतिष्ठा, निलंबन और सामाजिक छवि खराब करने की धमकी।

वसूली के पैसे से खरीदी गई बोलेरो भी बरामद

पुलिस के अनुसार, गिरोह द्वारा वसूले गए पैसों का इस्तेमाल संपत्ति और महंगी चीजें खरीदने में किया जाता था। पुलिस ने महिंद्रा बोलेरो गाड़ी बरामद की है, जिसका नंबर UP51 BN 5805 बताया गया है। जांच के अनुसार, यह वाहन करीब दो साल पहले जबरन वसूली से मिली रकम से खरीदा गया था और बाद में गिरोह के काम में इस्तेमाल होता था।

मोबाइल और CDR ने खोली जांच की अहम कड़ी

इस मामले में डिजिटल फॉरेंसिक जांच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी रही। पुलिस और सर्विलांस टीम ने सूर्य प्रकाश सिंह के मोबाइल का फॉरेंसिक क्लोन तैयार कर उसके डेटा और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की। इससे प्रियंका चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश के साथ उनके लगातार संपर्क की जानकारी सामने आई।

जांच के अनुसार, 29 अगस्त को सरकारी आवास पहुंचने के बाद दोपहर 1:41 बजे विजय प्रकाश ने सूर्य प्रकाश सिंह के निजी नंबर पर अंतिम कॉल की थी। पुलिस ने इस कॉल को जांच की महत्वपूर्ण कड़ी माना है। पुलिस के अनुसार, इस बातचीत में वित्तीय मांग और कानूनी कार्रवाई से जुड़े दबाव की जांच की गई।

पुलिस ने मोबाइल से ऑडियो रिकॉर्डिंग, स्क्रीनशॉट और वित्तीय लेन-देन से जुड़े बैंक संदेश भी बरामद किए हैं। इन डिजिटल रिकॉर्ड को मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया में दस्तावेजी साक्ष्य के तौर पर पेश किया जा सकता है।

BNS की धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

मृतक के बेटे संदीप सिंह की तहरीर और जांच में मिले तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बस्ती कोतवाली में मुकदमा अपराध संख्या 387/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत दर्ज किया है।

  • धारा 108 BNS: आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण से संबंधित प्रावधान।
  • धारा 3(5) BNS: सामान्य आशय के साथ किए गए अपराध में संयुक्त आपराधिक जिम्मेदारी से संबंधित प्रावधान।

विवेचनाधिकारी उपनिरीक्षक जयविंद कुमार यादव ने तीनों आरोपियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेज दिया। पुलिस ने गिरोह के बैंक खातों को फ्रीज कराने और पैसों के लेन-देन की पूरी कड़ी की जांच के लिए संबंधित बैंकों को नोटिस भी जारी किए हैं।

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पुलिस के सामने अब वित्तीय नेटवर्क की पूरी जांच की चुनौती

गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा कथित सिंडिकेट के वित्तीय नेटवर्क को समझना है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वसूली की रकम किन खातों में गई, किस तरह उसका इस्तेमाल हुआ और गिरोह ने कितने लोगों को निशाना बनाया। बोलेरो और मोबाइल फोन की बरामदगी के साथ बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

मृतक के बेटे संदीप सिंह ने पुलिस की कार्रवाई और मामले के खुलासे पर संतोष जताया है। वहीं, मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया में डिजिटल रिकॉर्ड, CDR, बैंक लेन-देन और अन्य फॉरेंसिक सामग्री की अहम भूमिका रहने की संभावना है।

पुलिसकर्मियों की सुरक्षा का भी उठा सवाल

यह मामला सिर्फ एक कथित हनीट्रैप और वसूली गिरोह तक सीमित नहीं है। इससे पुलिस और अन्य संवेदनशील सरकारी पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों की सामाजिक और मानसिक सुरक्षा का सवाल भी सामने आता है। किसी अधिकारी के लिए नौकरी, प्रतिष्ठा और विभागीय रिकॉर्ड बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में बदनामी या कानूनी कार्रवाई का डर ब्लैकमेल करने वालों के लिए दबाव बनाने का साधन बन सकता है।

इस मामले से यह भी सामने आता है कि डिजिटल बातचीत, निजी वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग और बैंक लेन-देन अब आपराधिक जांच में कितने महत्वपूर्ण हो चुके हैं। पारंपरिक गवाहों के साथ-साथ मोबाइल और डिजिटल फॉरेंसिक साक्ष्य किसी मामले की पूरी तस्वीर सामने लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

मामले से जुड़े प्रमुख सवाल

बस्ती वाल्टरगंज मामले में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए?

पुलिस ने 6 सितंबर को तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें प्रियंका चौधरी, रामनयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार गिरोह किस तरह काम करता था?

पुलिस के अनुसार, पहले लक्षित लोगों से व्यक्तिगत नजदीकी बढ़ाई जाती थी। इसके बाद निजी डिजिटल सामग्री के जरिए दबाव बनाया जाता और सामाजिक बदनामी या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर रकम मांगी जाती थी।

सूर्य प्रकाश सिंह मामले में कौन-सा डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण रहा?

पुलिस ने मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, ऑडियो रिकॉर्डिंग, स्क्रीनशॉट और बैंक लेन-देन से जुड़े संदेशों की जांच की। 29 अगस्त की दोपहर 1:41 बजे हुई अंतिम कॉल को भी जांच की महत्वपूर्ण कड़ी माना गया।

मामले में कौन-सी BNS धाराएं लगाई गई हैं?

पुलिस के अनुसार मुकदमा अपराध संख्या 387/2026 में BNS की धारा 108 और धारा 3(5) के तहत कार्रवाई की गई है।

गिरफ्तार आरोपियों से क्या बरामद हुआ?

पुलिस ने कथित वसूली की रकम से खरीदी गई महिंद्रा बोलेरो और अपराध में इस्तेमाल किए गए तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई जांच सामग्री और पुलिस के कथित खुलासे पर आधारित है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा।