मंडी में कंगना रनोट ने अधिकारियों को फटकारा, सांसद निधि खर्च न होने पर जताई नाराजगी

मंडी दिशा बैठक में अधिकारियों को फटकार लगातीं कंगना रनोट

मंडी: हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनोट ने शनिवार को जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। सांसद निधि का अपेक्षित इस्तेमाल नहीं होने पर कंगना ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह पूरा मामला एक मजाक बनकर रह गया है। उन्होंने अधिकारियों से पिछली बैठकों में लिए गए फैसलों पर भी काम करने को कहा।

बैठक के दौरान कंगना रनोट ने सभी बीडीओ को खड़ा कर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह नेशनल मीडिया में इस मुद्दे पर कुछ बोल नहीं पा रही हैं, जबकि लोग सोशल मीडिया पर रील बना रहे हैं और उन्हें निठल्ला कह रहे हैं। सांसद ने स्पष्ट किया कि सांसद का काम फंड उपलब्ध कराना है, जबकि उसे खर्च करने और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अधिकारियों की है।

‘सांसद का काम पैसा देना, खर्च करना अधिकारियों की जिम्मेदारी’

कंगना रनोट ने बैठक में कहा कि अधिकारी केवल खानापूर्ति के लिए बैठकों में शामिल न हों। उन्होंने पिछली बैठकों में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई थी, उन पर अब तक कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाए। सांसद ने अधिकारियों से पूछा कि जिन फैसलों पर पहले चर्चा हो चुकी है, उन पर काम आगे क्यों नहीं बढ़ा।

कंगना ने कहा कि देशभर में यह खबर चल रही है कि उन्होंने 11 करोड़ रुपये दिए हैं, लेकिन काम एक भी नहीं हुआ। उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह मीडिया के सामने क्या जवाब दें कि अधिकारी केवल तनख्वाह लेने के लिए आते हैं।

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11 करोड़ रुपये में से बहुत कम राशि खर्च होने पर सवाल

मंडी सांसद के मुताबिक, मार्च-अप्रैल तक सांसद निधि के 11 करोड़ रुपये में से केवल बहुत कम राशि खर्च हुई थी। उन्होंने कहा कि दो साल में पूरे क्षेत्र में एक करोड़ रुपये भी इस्तेमाल नहीं हुए थे। कंगना ने बताया कि इस मामले को लेकर उन्हें मंत्रालय से कई पत्राचार करने पड़े।

उन्होंने कहा कि उनके पीए और वह खुद मंत्रालय के कार्यालय में लगातार बैठते रहे। सांसद ने अधिकारियों से पूछा कि क्या मंत्रालय के पास इसके अलावा कोई और काम नहीं है। उनके मुताबिक, फंड उपलब्ध होने के बावजूद विकास कार्यों को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा था।

फंड लेने के बाद काम शुरू नहीं करने वालों पर भी नाराजगी

कंगना रनोट ने बैठक में कहा कि कई लोगों ने फंड लिया हुआ है, लेकिन काम शुरू नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग फंड पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं। कई मामलों में जमीन या जरूरी अनुमति नहीं होने की बात सामने आई है।

सांसद ने कहा कि कुछ मामलों में झूठे एमओयू पर हस्ताक्षर कर उन्हें भेजा गया है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिन लोगों के पास काम पूरा करने की स्थिति नहीं है, उनसे राशि वापस कराने की जिम्मेदारी अधिकारियों की है।

काम पूरा होने के बाद भी खातों में राशि बची होने पर सवाल

कंगना ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि जिन लोगों को फंड दिया गया है, उनसे संपर्क करने के लिए अधिकारियों ने कितने फोन किए। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने अपना काम पूरा कर लिया है, लेकिन इसके बावजूद उनके अकाउंट में रुपये बचे हुए हैं और काम सिस्टम में दिखाई नहीं दे रहा है।

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सांसद ने यह भी कहा कि जिन लोगों ने पैसा इस्तेमाल कर काम पूरा कराया है, उनमें से कुछ लोग काम की जानकारी अपलोड करने की प्रक्रिया नहीं जानते। कंगना ने इस पर अधिकारियों को दी गई ट्रेनिंग का जिक्र करते हुए सवाल किया कि जब इतनी ट्रेनिंग कराई गई है तो फिर काम क्यों रुका हुआ है।

‘अगर काम आगे नहीं बढ़ाना है तो बैठक क्यों कर रहे हैं?’

दिशा बैठक में कंगना रनोट ने अधिकारियों से पूछा कि जब विकास कार्यों को आगे बढ़ाना ही नहीं है तो बैठकें क्यों की जा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों से काम को आगे बढ़ाने और पिछली बैठकों में लिए गए फैसलों पर कार्रवाई करने की बात कही।

कंगना ने कहा कि अधिकारियों का दायित्व है कि फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करें और जिन मामलों में काम शुरू नहीं हुआ है, वहां आवश्यक कार्रवाई करें। उन्होंने सांसद निधि से जुड़े कामों को आगे बढ़ाने में हो रही देरी पर अपनी नाराजगी स्पष्ट रूप से जाहिर की।

दिशा की बैठक में सांसद द्वारा अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवालों का मुख्य केंद्र सांसद निधि के इस्तेमाल, लंबित विकास कार्यों, फंड लेने के बाद काम शुरू नहीं करने वाले मामलों और पूर्ण हो चुके कार्यों की जानकारी अपलोड करने में हो रही देरी रहा।