कौशांबी पटाखा विस्फोट: 13 की मौत, मुख्य आरोपी नौशाद गिरफ्तार, पुलिसकर्मी निलंबित

प्रयागराज-कौशांबी सीमा के चिल्ला शहबाजी क्षेत्र में अवैध पटाखा निर्माण इकाई में हुए भीषण विस्फोट में 13 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 8 नाबालिग बच्चे शामिल हैं। हादसे के बाद राहत, पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक जांच के साथ स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठे हैं।

प्रयागराज कौशांबी पटाखा विस्फोट के बाद घटनास्थल पर राहत और बचाव अभियान

प्रयागराज-कौशांबी सीमा — कौशांबी के पिपरी थाना क्षेत्र के चिल्ला शहबाजी (महमूदपुर मनौरी) गांव में 31 अगस्त की पूर्वाह्न करीब 11:30 बजे अवैध पटाखा निर्माण इकाई में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को हिला दिया। हादसे में कुल 13 लोगों की मौत हुई, जिनमें 8 नाबालिग बच्चे शामिल हैं। 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलसे और घायल हुए हैं, जिनका उपचार कौशांबी जिला अस्पताल तथा प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में कराया गया।

खास बातें

  • 31 अगस्त को चिल्ला शहबाजी में हुए विस्फोट में 13 लोगों की मौत हुई, जिनमें 8 बच्चे शामिल हैं।
  • विस्फोट से आसपास के पक्के मकान, बूंदी निर्माण कारखाना और बिजली ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ तथा दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर करीब एक घंटे तक परिचालन प्रभावित रहा।
  • मृतक गया प्रसाद साहू के चार बच्चों के लिए कुल ₹32 लाख की समेकित वित्तीय सहायता दी गई।
  • मुख्य आरोपी मोहम्मद नौशाद को पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया, जबकि कुछ अन्य आरोपी फरार हैं।
  • पिपरी थाने के पुलिसकर्मियों के निलंबन और विभागीय जांच के साथ मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं।

अवैध पटाखा निर्माण इकाई में कैसे हुआ विस्फोट

उपलब्ध घटनाक्रम के अनुसार, घटना के समय इलाके में रिमझिम बारिश हो रही थी और श्रमिक तथा स्थानीय लोग घरों एवं कार्यशालाओं के भीतर थे। परिसर में भारी मात्रा में डंप किए गए बारूद और अत्यधिक अस्थिर रासायनिक पदार्थों के मिश्रण के दौरान अचानक आग भड़क गई, जिसने कुछ ही समय में बड़े विस्फोट का रूप ले लिया।

विस्फोट की धमक और कंपन करीब 2 से 5 किलोमीटर तक महसूस किए गए। लगभग 50 से 70 मीटर के दायरे में स्थित 5 से 7 पक्के मकान और पास का बूंदी निर्माण कारखाना मलबे में तब्दील हो गया। आरसीसी बीम, कंक्रीट स्लैब, ईंटें और लोहे के मुख्य द्वार 400 से 500 मीटर दूर कृषि भूमि तक जा गिरे। करीब एक किलोमीटर के दायरे में कई इमारतों के दरवाजे और शीशे भी टूट गए।

विस्फोट का असर बिजली ढांचे और रेल परिचालन पर भी पड़ा। रेलवे की 132 केवीए विद्युत उपकेंद्र संरचना तथा हाईटेंशन टावर के एंगल्स टूटकर गिर गए। इसके कारण दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर करीब एक घंटे तक रेल परिचालन बाधित रहा।

लाइसेंस 2024 में निरस्त, फिर भी जारी था निर्माण

इस अवैध निर्माणशाला का संचालन मनौरी निवासी मोहम्मद नौशाद और उसके परिजनों द्वारा किया जा रहा था। उपलब्ध नियामक अभिलेखों के अनुसार, इकाई का पटाखा निर्माण लाइसेंस वर्ष 2024 में ही निरस्त कर दिया गया था। इसके बावजूद आवासीय बस्तियों, दुकानों और खाद्य कारखानों के बीच विस्फोटक सामग्री का भंडारण और पटाखा निर्माण जारी रहा।

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हादसे ने इसी बिंदु पर स्थानीय निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लाइसेंस निरस्त होने के बाद भी गतिविधियां जारी रहने और बारूद के कथित अवैध परिवहन तथा भंडारण की जानकारी स्थानीय स्तर पर क्यों नहीं रोकी गई, इसकी जांच अब प्रशासनिक स्तर पर की जा रही है।

13 लोगों की मौत, 20 से अधिक घायल

जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन सेवा, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और वायुसेना स्टेशन मनौरी के 50 जवानों ने करीब 10 घंटे तक संयुक्त खोज एवं बचाव अभियान चलाया। मलबा हटाने के लिए 10 से अधिक जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल किया गया।

हताहत वर्ग / परिवारप्रभावित व्यक्तियों का विवरणआयु / स्थितिविधिक एवं चिकित्सीय स्थिति
गया प्रसाद साहू का परिवारजाह्नवी, आदित्य, रवि, अमित12–15 वर्ष, 10–12 वर्ष, 7–8 वर्ष, 2 वर्षमलबे में दबने से घटनास्थल पर मृत्यु; पोस्टमार्टम के बाद पुष्टि
गया प्रसाद की पत्नीअनीता साहू (उर्फ स्वरूपरानी)38–42 वर्षगंभीर रूप से घायल; एसआरएन अस्पताल प्रयागराज में उपचाराधीन
विक्रम सरोज का परिवारविक्रम सरोज, अंजू, अंश, शिवम / नन्हा35 वर्ष, 23–35 वर्ष, 6 वर्ष, 4 वर्षमलबे में दबने व जलने से मृत्यु
मंजीत कुमार का परिवारप्रवीन कुमार, प्रियांजलि13 वर्ष, 5 वर्षमलबे से निकालने के बाद एसआरएन अस्पताल ले जाते समय मृत्यु
श्रमिक एवं अन्य नागरिकसुनील मौर्य, राजेश, ज्ञान सिंह30 वर्ष, वयस्क, 35–40 वर्षविखंडित अंगों से शिनाख्त / अस्पताल में उपचार के दौरान मृत्यु

विस्फोट की तीव्रता के कारण कुछ मृतकों के शरीर के अंग घटनास्थल से दूर खेतों में बिखर गए थे। बूंदी कारखाने में कार्यरत मजदूर सुनील मौर्य की पहचान भी कठिन रही। उनके शरीर के अंगों की शिनाख्त परिजनों ने टैटू और शारीरिक निशानों के आधार पर की, जिसके बाद विधिक पुष्टि के लिए डीएनए परीक्षण की संस्तुति की गई।

चार बच्चों की मौत के बाद सड़क पर उतरे पिता

मीरपुर गांव निवासी गया प्रसाद साहू का मकान अवैध निर्माणशाला की दीवार से सटा हुआ था। विस्फोट में उनका घर पूरी तरह ध्वस्त हो गया और उनके चार बच्चों की मौत हो गई। मृतकों में 15 वर्षीय जाह्नवी, 10 वर्षीय आदित्य, 7 वर्षीय रवि और 2 वर्षीय अमित शामिल थे। उनकी पत्नी अनीता साहू गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में भर्ती थीं।

पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार शाम जब चारों बच्चों के शव भारी बारिश के बीच मीरपुर गांव पहुंचे, तो गया प्रसाद ने ग्रामीणों के साथ मुख्य मार्ग पर शव रखकर आवागमन रोक दिया। उन्होंने प्रशासन से परिवार के लिए पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा और स्थायी आजीविका की व्यवस्था की मांग की।

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गया प्रसाद की प्रमुख मांगों में सहायता राशि बढ़ाना और मनौरी कस्बे में कृषि कार्य के लिए भूमि का पट्टा देना शामिल था, जहां उनका घर विस्फोट में नष्ट हुआ था।

सीओ सत्येंद्र तिवारी ने संभाला मानवीय संकट

सड़क जाम और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए सिराथू के पुलिस क्षेत्राधिकारी सत्येंद्र तिवारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने गया प्रसाद से संवेदनशील तरीके से बातचीत की और उन्हें अंतिम संस्कार करने के लिए समझाया। अधिकारी ने उन्हें सांत्वना देते हुए भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनके साथ खड़ा है।

इसके बाद परिजनों ने जाम समाप्त किया और देर शाम चारों बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया। अगले दिन जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा पासवान और जिला प्रशासन ने गया प्रसाद साहू को कुल ₹32 लाख की समेकित वित्तीय सहायता का चेक सौंपा।

गया प्रसाद के परिवार को ₹32 लाख की राहत

प्रशासनिक मद / राहत कोषप्रति मृतक राशिचार बच्चों के लिए कुल राशि
राज्य दैवीय आपदा राहत कोष₹4,00,000₹16,00,000
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF)₹2,00,000₹8,00,000
मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF)₹2,00,000₹8,00,000
समेकित अनुग्रह राशि₹8,00,000₹32,00,000

कृषि भूमि के पट्टे की मांग पर अधिकारियों ने सहानुभूतिपूर्वक विचार का आश्वासन दिया था। हालांकि उपलब्ध प्रशासनिक विवरण के अनुसार मनौरी कस्बे का संबंधित क्षेत्र राजस्व अभिलेखों में गैर-कृषि और घनी आबादी वाला दर्ज है। इसलिए वहां तत्काल कृषि पट्टा जारी किए जाने का कोई विधिक निर्णय रिकॉर्ड पर नहीं आया।

मुख्य आरोपी नौशाद गिरफ्तार, मुठभेड़ में घायल

गया प्रसाद साहू की तहरीर पर पिपरी थाने में विस्फोटक अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। इसमें अवैध फैक्ट्री संचालक मोहम्मद नौशाद और उसके परिजनों को नामजद किया गया।

घटना के बाद नौशाद फरार था और जनपद की सीमा पार करने का प्रयास कर रहा था। मंगलवार तड़के करीब 4 बजे पिपरी पुलिस की विशेष टीम ने सैयद सरावां क्षेत्र में ईंट-भट्ठे के पास उसकी घेराबंदी की। पुलिस के अनुसार, नौशाद ने 315 बोर के अवैध तमंचे से पुलिस दल पर गोलीबारी की। जवाबी कार्रवाई में पैर में गोली लगने से वह घायल हुआ और उसे गिरफ्तार कर जिला अस्पताल मंझनपुर में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। उसके पास से तमंचा और कारतूस बरामद किए गए।

नामजद अभियुक्तपारिवारिक संबंधआपराधिक स्थिति एवं कार्रवाई
मोहम्मद नौशादमुख्य संचालक / मास्टरमाइंडमुठभेड़ के बाद घायल, गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत
शबानानौशाद के भाई शकील की पत्नीपूछताछ के बाद औपचारिक गिरफ्तारी
साइनानौशाद की भतीजी, शकील की पुत्रीसह-अभियुक्त के रूप में गिरफ्तार
कहकशा बानोनौशाद की पत्नीफरार; ₹25,000 का नकद इनाम घोषित
आदिलनौशाद का पुत्रफरार; ₹25,000 का नकद इनाम घोषित
शकीलनौशाद का भाई / साझेदारफरार; संपत्तियों की कुर्की प्रक्रिया जारी और ₹25,000 का इनाम
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तीन दुकानें और तीन मंजिला मकान ध्वस्त

शासन के निर्देश पर प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) और स्थानीय राजस्व प्रशासन ने आरोपियों की संपत्तियों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। नौशाद द्वारा मनौरी बाजार और रेलवे ओवरब्रिज के नीचे संचालित तीन दुकानों तथा गोदामों को बुलडोजर से ढहा दिया गया। इन स्थानों का इस्तेमाल अवैध विस्फोटकों के भंडारण के लिए किया जाता था।

इसके बाद महमूदपुर मनौरी स्थित नौशाद के तीन मंजिला अवैध आवासीय भवन को भी ध्वस्त किया गया। जिला मजिस्ट्रेट ने आरोपियों के संगठित गिरोह पर उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम यानी गैंगस्टर एक्ट लागू कर अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की जब्ती का आदेश जारी किया।

पुलिसकर्मियों पर निलंबन और विभागीय जांच

हादसे के बाद स्थानीय पुलिस निगरानी व्यवस्था की भूमिका की जांच शुरू हुई। प्रयागराज परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक अजय कुमार मिश्रा और कौशांबी के पुलिस अधीक्षक के स्तर से कार्रवाई की गई। पिपरी थाने के तत्कालीन निरीक्षक शिवचरण राम और छह उपनिरीक्षकों विकास सिंह, विनय सिंह, अजीत कुमार सिंह, अभिषेक गुप्ता, मनीष पाल तथा अमित द्विवेदी को निलंबित किया गया।

क्षेत्र में तैनात बीट आरक्षी जितेंद्र कुमार और कृष्ण कुमार को भी बीट सूचना संकलन में लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया। उपलब्ध विवरण में कुल 9 से 12 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई का उल्लेख है। पिपरी थाना प्रभारी और चायल चौकी प्रभारियों को लाइन हाजिर किया गया। साथ ही पिछले दो वर्षों में पिपरी थाने और संबंधित चौकी में तैनात रहे कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई।

मजिस्ट्रेटी जांच में अवैध बारूद सप्लाई की पड़ताल

जिलाधिकारी डॉ. अमित पाल शर्मा ने घटना के मूल कारणों, विस्फोटक सामग्री की कथित अवैध आपूर्ति शृंखला और स्थानीय कर्मचारियों की भूमिका की जांच के लिए मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। जांच समिति को यह पता लगाने का दायित्व सौंपा गया है कि प्रतिबंधित विस्फोटक सामग्री किन स्थानीय या अंतरराज्यीय स्रोतों से सीमावर्ती क्षेत्र में पहुंच रही थी।

इस घटना के बाद सबसे अहम सवाल लाइसेंस निरस्तीकरण के बावजूद अवैध निर्माण और भंडारण जारी रहने से जुड़ा है। प्रशासनिक जांच और विभागीय कार्रवाई के जरिए इसी निगरानी तंत्र की भूमिका तथा जिम्मेदारी को सामने लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।