दिनेश शर्मा बने अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल

उत्तर प्रदेश के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज है।

दिनेश शर्मा अंडमान-निकोबार के नए उपराज्यपाल
डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है।

नई दिल्ली — उत्तर प्रदेश के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से शनिवार देर रात जारी आदेश के अनुसार, उनकी नियुक्ति उस तारीख से प्रभावी होगी जिस दिन वह उपराज्यपाल पद का कार्यभार संभालेंगे।

62 वर्षीय दिनेश शर्मा फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं और उनका कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त होना था। ऐसे में राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने से पहले उन्हें उपराज्यपाल की जिम्मेदारी मिलना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दिनेश शर्मा का यूपी की राजनीति में लंबा अनुभव

डॉ. दिनेश शर्मा लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति और बीजेपी संगठन से जुड़े रहे हैं। 2017 से 2022 के बीच वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली पहली सरकार में उप-मुख्यमंत्री रहे। इस दौरान उनके पास माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विभागों की जिम्मेदारी थी।

राजनीति में सक्रिय होने से पहले दिनेश शर्मा लखनऊ विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग में प्रोफेसर थे। वह दो बार लखनऊ के महापौर भी रह चुके हैं। 2008 में पहली बार मेयर बनने के बाद उन्होंने 2012 में दोबारा यह जिम्मेदारी संभाली।

बीजेपी संगठन में भी उनका राजनीतिक कद बढ़ता रहा। 2014 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था। इसके अलावा वह बीजेपी के गुजरात प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। साल 2023 में उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुना गया था।

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2027 यूपी चुनाव के बीच नियुक्ति पर नजर

दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार का उपराज्यपाल बनाए जाने का फैसला ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसी वजह से उनकी नई जिम्मेदारी को व्यापक राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

बीजेपी ने हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश को लेकर संगठन में कई बदलाव किए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से आठ नेताओं को जगह मिली है। इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

ब्राह्मण चेहरे के तौर पर दिनेश शर्मा की भूमिका

दिनेश शर्मा ब्राह्मण समुदाय से आते हैं और उत्तर प्रदेश बीजेपी में लंबे समय से इस समुदाय के प्रमुख चेहरों में गिने जाते रहे हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति को राज्य के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, बीजेपी उत्तर प्रदेश में अपने पारंपरिक सवर्ण आधार को बनाए रखने के साथ अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, दिनेश शर्मा की नियुक्ति को सिर्फ जातीय समीकरणों से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। उनका राजनीतिक, संगठनात्मक, प्रशासनिक और शैक्षणिक अनुभव भी इस जिम्मेदारी के लिए महत्वपूर्ण पक्ष माना जा सकता है।

हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सामाजिक रणनीति की चर्चा के बीच पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को भी नितिन नवीन की नई टीम में राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है। द्विवेदी बस्ती से दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और लंबे समय तक बीजेपी संगठन में सक्रिय रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू हुआ था।

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हरीश द्विवेदी भी ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। उत्तर प्रदेश में उनके संगठनात्मक आधार को देखते हुए उनकी नई जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण माना गया है। दूसरी ओर, बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में OBC, दलित और मुस्लिम समुदायों से जुड़े नेताओं को भी प्रमुख स्थान दिए जाने का उल्लेख किया गया है।

इससे पार्टी की रणनीति को केवल किसी एक समुदाय पर केंद्रित करने के बजाय अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

नई भूमिका में दिनेश शर्मा के सामने क्या जिम्मेदारी होगी?

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल पद संवैधानिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। दिनेश शर्मा को विश्वविद्यालय, बीजेपी संगठन, राज्य सरकार और संसद, चारों स्तरों पर काम करने का अनुभव रहा है।

अगस्त 2026 तक राज्यसभा में उनकी उपस्थिति 94 प्रतिशत रही। इस दौरान उन्होंने 226 सवाल पूछे और 34 बहसों में हिस्सा लिया। अब उनकी नई भूमिका केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन की जिम्मेदारी से जुड़ी होगी।

बीजेपी की यूपी रणनीति में क्या संदेश?

उत्तर प्रदेश 2027 का विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को राज्य में अपेक्षाकृत झटका लगा था। इसके बाद संगठन में चुनावी प्रदर्शन, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और सामाजिक समीकरणों को लेकर मंथन की चर्चा रही।

इसी बीच राष्ट्रीय संगठन में उत्तर प्रदेश से आठ नेताओं को जगह मिलना और दिनेश शर्मा को संवैधानिक पद की जिम्मेदारी मिलना पार्टी की व्यापक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। स्रोत के अनुसार, बीजेपी एक ओर OBC, दलित और अन्य सामाजिक समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं पारंपरिक सवर्ण आधार को भी साथ बनाए रखने पर जोर दे रही है।

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दिनेश शर्मा अब अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल के रूप में नई जिम्मेदारी संभालेंगे। उनकी नियुक्ति की औपचारिक प्रभावी तारीख कार्यभार ग्रहण करने के दिन से होगी।