‘हनुमान अंश’ की अप्रत्याशित बॉक्स ऑफिस सफलता ने फिल्म के साथ-साथ उसके लीड एक्टर शोभिनव सत्या को भी सुर्खियों में ला दिया है। कैमरे के पीछे सेकंड असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे शोभिनव को अचानक नीम करोली बाबा का किरदार निभाने का मौका मिला और उनकी पहली फीचर फिल्म ही बड़ी थिएट्रिकल हिट बन गई।

कम बजट की फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने 2026 के बॉक्स ऑफिस पर ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसकी शुरुआत में शायद किसी ने उम्मीद नहीं की थी। नीम करोली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित इस फिल्म में युवा नीम करोली बाबा की भूमिका शोभिनव सत्या ने निभाई है। बतौर लीड एक्टर यह उनकी पहली फीचर फिल्म है। फिल्म ने धीमी शुरुआत के बाद रफ्तार पकड़ी और 2 सितंबर तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार भारत में इसका नेट कलेक्शन ₹54 करोड़ से ऊपर पहुंच चुका था।
कौन हैं शोभिनव सत्या?
शोभिनव सत्या का ताल्लुक लखनऊ से है। एक्टिंग के साथ-साथ उन्होंने फिल्म निर्माण की दूसरी जिम्मेदारियों में भी काम किया है। उपलब्ध प्रोफाइल और ताजा रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने पुणे के Film and Television Institute of India (FTII) से प्रशिक्षण लिया है और मनोरंजन उद्योग में अभिनेता के रूप में पहचान बनाने से पहले असिस्टेंट डायरेक्टर, सेकंड यूनिट डायरेक्टर तथा स्क्रिप्ट और कंटिन्यूटी से जुड़े काम कर चुके हैं।
यानी ‘हनुमान अंश’ से पहले कैमरा उनके लिए बिल्कुल नया नहीं था। अंतर सिर्फ इतना था कि इस बार वह कैमरे के पीछे नहीं, बल्कि उसके सामने फिल्म के सबसे महत्वपूर्ण किरदार के रूप में खड़े थे।
असिस्टेंट डायरेक्टर से सीधे लीड एक्टर बनने की कहानी
शोभिनव सत्या के इस डेब्यू की सबसे दिलचस्प बात उनका कास्टिंग सफर है। वह शुरुआत में ‘हनुमान अंश’ की टीम के साथ सेकंड असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम कर रहे थे। फिल्म में नीम करोली बाबा का किरदार निभाने के लिए पहले किसी दूसरे अभिनेता को चुना गया था, लेकिन उनके अचानक बीमार पड़ने के बाद निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने शोभिनव को इस भूमिका के लिए टेस्ट करने का फैसला किया।
इसके बाद शोभिनव का करीब पांच घंटे तक स्क्रीन टेस्ट हुआ। टेस्ट के बाद विशाल चतुर्वेदी ने उन्हें युवा नीम करोली बाबा के किरदार के लिए चुन लिया। इस तरह जो व्यक्ति एक दिन फिल्म के निर्माण में पर्दे के पीछे जिम्मेदारी संभाल रहा था, वह अगले ही चरण में फिल्म का मुख्य चेहरा बन गया।
नीम करोली बाबा का किरदार निभाना क्यों था चुनौतीपूर्ण?
नीम करोली बाबा जैसे आध्यात्मिक व्यक्तित्व को पर्दे पर उतारना केवल उनकी वेशभूषा या हाव-भाव की नकल करने तक सीमित नहीं था। निर्देशक और शोभिनव ने बाबा के जीवन, शिक्षाओं और आध्यात्मिक व्यक्तित्व को समझने पर भी ध्यान दिया। शोभिनव ने बताया कि निर्देशक ने उन्हें केवल हूबहू नकल करने के बजाय अपने स्वाभाविक अंदाज को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया।
शोभिनव ने अपनी कास्टिंग को भी आध्यात्मिक नजरिए से देखा है। उनके अनुसार वह लंबे समय से नीम करोली बाबा के भक्त रहे हैं और उन्हें यह मौका किसी सामान्य करियर ब्रेक से कहीं अधिक विशेष अनुभव लगा।
‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर कैसे बदली कहानी?
फिल्म की शुरुआत बेहद सामान्य रही। रिपोर्टों के अनुसार पहले दिन इसका कलेक्शन करीब ₹10 लाख रहा, लेकिन आगे चलकर दर्शकों की प्रतिक्रिया और माउथ पब्लिसिटी ने फिल्म को मजबूत किया। कम बजट और सीमित स्टार पावर वाली फिल्म का कई हफ्तों तक सिनेमाघरों में टिके रहना इसकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया।
2 सितंबर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म ने रिलीज के 26वें दिन भारत में ₹8.50 करोड़ का नेट कलेक्शन किया और कुल भारत नेट कलेक्शन ₹54.13 करोड़ तक पहुंच गया। फिल्म का रिपोर्टेड बजट लगभग ₹1.80 करोड़ बताया गया है।
फिल्म की सफलता पर फिल्ममेकर मधुर भंडारकर ने भी प्रतिक्रिया दी और निर्देशन तथा शोभिनव सत्या के प्रदर्शन की तारीफ की। उन्होंने इसे भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक महत्वपूर्ण केस स्टडी बताया।
शोभिनव सत्या के लिए बदल गया करियर
‘हनुमान अंश’ की सफलता ने शोभिनव सत्या को अचानक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। उनकी कहानी इसलिए भी अलग है क्योंकि उन्होंने स्टार बनने की पारंपरिक राह के बजाय फिल्म निर्माण के पीछे काम करते हुए शुरुआत की और उसी अनुभव के बीच उन्हें अपने करियर का सबसे बड़ा अभिनय अवसर मिला।
फिलहाल ‘हनुमान अंश’ की सफलता जारी है और निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने फिल्म के अगले अध्याय पर भी काम आगे बढ़ाने की पुष्टि की है। ऐसे में शोभिनव सत्या के लिए यह फिल्म केवल डेब्यू नहीं, बल्कि एक ऐसे करियर की शुरुआत बनती दिख रही है जिसकी नींव उन्होंने कैमरे के पीछे रहकर पहले ही तैयार कर ली थी।
डिस्क्लेमर: बॉक्स ऑफिस के आंकड़े ट्रेड और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं और इनमें आगे बदलाव संभव है। नीम करोली बाबा से जुड़े आध्यात्मिक प्रसंगों को फिल्म और संबंधित स्रोतों में प्रस्तुत संदर्भ के रूप में समझना चाहिए।

Praveen Yadav is the Founder and Editor at The Nation Bulletin. With over 3 years of experience in digital journalism and news reporting, he covers national affairs, governance, and breaking current events with a commitment to factual accuracy and verified reporting.


