लखनऊ के बख्शी का तालाब स्थित राम सागर मिश्रा संयुक्त चिकित्सालय में प्रसव के दौरान ₹6,000 मांगने और गर्भवती महिला को ऑपरेशन थिएटर से बाहर किए जाने का मामला सामने आया। वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए डॉक्टर का तबादला और ओटी अटेंडेंट की सेवा समाप्त कर दी।

लखनऊ, India — बख्शी का तालाब क्षेत्र के राम सागर मिश्रा 100 शैय्या युक्त संयुक्त चिकित्सालय में गर्भवती महिला से कथित तौर पर ₹6,000 की मांग और ऑपरेशन थिएटर से बाहर किए जाने के मामले ने स्वास्थ्य विभाग में हलचल पैदा कर दी। भवानीपुर गांव निवासी लल्ला अपनी पत्नी धर्मी को प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल लेकर पहुंचे थे। मामला सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद शासन के संज्ञान में आया, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की।
मुख्य बातें
- परिजनों के अनुसार, ऑपरेशन थिएटर में गर्भवती महिला के लिए ₹6,000 की मांग की गई।
- डॉ. पूजा सिंह का तत्काल तबादला किया गया और ओटी अटेंडेंट देवेंद्र कुमार सिंह की सेवा समाप्त कर दी गई।
- डॉ. उमेश सचान को एकल सदस्यीय जांच अधिकारी बनाया गया है और सात दिन में रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी दी गई है।
- मरीज को दो यूनिट पीआरबीसी रक्त दिया गया और जच्चा व भ्रूण की स्थिति स्थिर बताई गई।
राम सागर मिश्रा अस्पताल में प्रसूता से अवैध वसूली का मामला
लल्ला बुधवार सुबह अपनी गर्भवती पत्नी धर्मी को प्रसव पीड़ा की शिकायत पर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। ओपीडी में जांच के बाद ड्यूटी पर तैनात विशेषज्ञ चिकित्सक ने सिजेरियन डिलीवरी को जरूरी बताया। इसके बाद धर्मी को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया।
परिजनों द्वारा बताए गए घटनाक्रम और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के अनुसार, ओटी में मौजूद कर्मचारियों और चिकित्सकीय सहयोगियों ने ऑपरेशन के लिए ₹6,000 की मांग की। परिवार ने तत्काल नकद राशि देने में असमर्थता जताई। इसके बाद प्रक्रिया रोक दी गई और धर्मी को ओटी से बाहर कर दिया गया।
परिजनों को अगले दिन तक रकम का इंतजाम करने या मरीज को किसी बड़े अस्पताल ले जाने की बात कही गई। लल्ला ने अस्पताल परिसर में अपनी आपबीती रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा की, जिसके बाद मामला स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचा।
प्रशासन ने डॉक्टर का तबादला किया, ओटी अटेंडेंट बर्खास्त
वीडियो सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य महानिदेशालय और लखनऊ मंडलीय स्वास्थ्य प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश दिए। प्राथमिक जांच के आधार पर डॉ. पूजा सिंह का आरएसएम अस्पताल से तत्काल तबादला कर उन्हें माल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से संबद्ध किया गया। देवेंद्र कुमार सिंह को अस्पताल की संविदा/आउटसोर्स सेवाओं से तत्काल बर्खास्त कर दिया गया।
| पद / कर्मचारी | की गई कार्रवाई | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| डॉ. पूजा सिंह | तत्काल स्थानांतरण | माल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से संबद्ध |
| देवेंद्र कुमार सिंह | सेवा समाप्त | संविदा/आउटसोर्स सेवा से बर्खास्त |
| डॉ. शबा आफरीन | अतिरिक्त प्रभार | महिला एवं प्रसूति विभाग का कार्यभार |
| डॉ. उमेश सचान | एकल सदस्यीय जांच अधिकारी नियुक्त | सात दिन में रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी |
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों और तीमारदारों का शोषण करने वाले किसी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। उसी दिन अनधिकृत रूप से ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले 26 सरकारी डॉक्टरों की बर्खास्तगी और 8 से 9 अन्य के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए जाने की जानकारी भी दी गई।
डॉ. पूजा सिंह ने आरोपों को बताया निराधार
प्रकरण में आरोपी चिकित्सक और तीमारदारों के बयानों में अंतर सामने आया है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वी. के. शर्मा की ओर से भेजी गई प्राथमिक सूचना के आधार पर शासन ने कार्रवाई की थी। वहीं डॉ. पूजा सिंह ने अपने ऊपर लगे वित्तीय भ्रष्टाचार के आरोपों को मनगढ़ंत और निराधार बताया।
डॉ. पूजा सिंह के अनुसार, धर्मी गंभीर एनीमिया से पीड़ित थीं और उनका हीमोग्लोबिन स्तर 7.6 ग्राम प्रति डेसीलीटर दर्ज किया गया था। चिकित्सक का कहना है कि महिला की अनुमानित प्रसव तिथि 23 सितंबर थी और वह सामान्य उदर शूल की शिकायत लेकर आई थीं। दर्द नियंत्रित होने के बाद संभावित सिजेरियन जटिलताओं को देखते हुए परिजनों से दो यूनिट रक्त की व्यवस्था करने को कहा गया था। चिकित्सक ने ₹6,000 मांगने के आरोप से इनकार किया।
विभागीय जांच में यह भी देखा जाना है कि यदि महिला को सामान्य दर्द था और प्रसव की अनुमानित तिथि 23 सितंबर थी, तो उसे ओटी की सर्जिकल टेबल तक क्यों ले जाया गया और बाद में वहां से बाहर क्यों किया गया। जांच में इस घटनाक्रम और अस्पताल की मानक संचालन प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की समीक्षा की जाएगी।
मरीज को दो यूनिट रक्त दिया गया
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने धर्मी को सरकारी एंबुलेंस से उनके भवानीपुर स्थित घर से वापस अस्पताल लाकर भर्ती कराया। 7.6 ग्राम हीमोग्लोबिन के स्तर को देखते हुए लोकबंधु राजनारायण संयुक्त चिकित्सालय से समन्वय किया गया।
अस्पताल प्रशासन ने लोकबंधु ब्लड बैंक से दो यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल्स की व्यवस्था की। मरीज को दोनों यूनिट रक्त दिया गया। इसके बाद उसका हीमोग्लोबिन स्तर सुरक्षित सीमा तक पहुंचने और जच्चा व भ्रूण की स्थिति स्थिर होने की जानकारी दी गई।
| चिकित्सकीय जानकारी | Source में दी गई स्थिति |
|---|---|
| हीमोग्लोबिन | 7.6 ग्राम प्रति डेसीलीटर |
| रक्त की व्यवस्था | दो यूनिट पीआरबीसी |
| रक्त स्रोत | लोकबंधु ब्लड बैंक |
| जच्चा और भ्रूण | स्थिति स्थिर बताई गई |
| अनुमानित प्रसव तिथि | 23 सितंबर |
सात दिन में जांच रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी
स्वास्थ्य विभाग ने लखनऊ के मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. उमेश सचान को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उन्हें घटना के समय-वार विवरण, ड्यूटी रोस्टर, ओटी लॉगबुक और संबंधित कर्मचारियों के बयानों की समीक्षा कर सात दिनों में रिपोर्ट देनी है।
| विधिक / प्रशासनिक पहलू | स्थिति |
|---|---|
| विभागीय जांच | सक्रिय और समयबद्ध |
| प्रशासनिक कार्रवाई | डॉक्टर का तबादला और ओटी अटेंडेंट की सेवा समाप्त |
| पुलिस प्राथमिकी | जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट की पुष्टि के बाद तहरीर की संभावना |
| विधिक कार्रवाई | रिपोर्ट में पुष्टि होने पर संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई संभव |
अस्पताल में पहले भी उठ चुके हैं सवाल
Source Material के अनुसार, राम सागर मिश्रा संयुक्त चिकित्सालय पहले भी वित्तीय अनियमितताओं, चिकित्सकों के व्यवहार और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़े आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है। फरवरी 2026 में भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष आलोक वर्मा ने अस्पताल में संविदा पर तैनात एक चिकित्सक के खिलाफ सीएमओ को शिकायत भेजी थी। शिकायत में निजी क्लिनिक चलाने, सरकारी दवाओं और सर्जिकल सामग्री की कथित हेराफेरी तथा मरीजों को निजी अस्पताल ले जाने जैसे आरोप लगाए गए थे।
मरीजों से कथित दुर्व्यवहार और चिकित्सीय लापरवाही से जुड़े मामलों में भी पूर्व में कार्रवाई और स्पष्टीकरण नोटिस का उल्लेख Source Material में है। अस्पताल के अधीन जानकीपुरम ट्रॉमा सेंटर के चार चिकित्सकों को चिकित्सीय दायित्वों में लापरवाही के आरोपों पर स्पष्टीकरण नोटिस दिए जाने की जानकारी भी दी गई है।
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की दूर की तारीखें देकर मरीजों को निजी केंद्रों पर भेजने और बाहर की दवाएं लिखने के कथित कमीशन नेटवर्क के खिलाफ ऐपवा और आरवाईए जैसे संगठनों के विरोध प्रदर्शन का भी Source Material में उल्लेख है।
अगली कार्रवाई जांच रिपोर्ट पर निर्भर
इस प्रकरण में अब जांच अधिकारी की रिपोर्ट अहम होगी। डॉ. उमेश सचान को उपलब्ध रिकॉर्ड, ओटी लॉगबुक, ड्यूटी रोस्टर और संबंधित लोगों के बयानों की समीक्षा के बाद रिपोर्ट देनी है। इसके बाद भ्रष्टाचार या जबरन वसूली से जुड़े आरोपों की पुष्टि होने पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से आगे की विधिक कार्रवाई की जा सकती है।
Sonu Yaduvanshi is a Senior Content Specialist and Digital News Editor at The Nation Bulletin with over 5 years of editorial experience. He specializes in government recruitments, competitive exams, public policy, and national affairs, focusing on source-verified reporting and factual clarity for readers.


